इस ब्लॉग में चिंतन, रचना, आलोचना आदि पर अपने विचार और जो विचार मुझे अच्छे लगे हैं, उनको लोगों के साथ बाँटना चाहूँगी। कुछ मौलिक कुछ उद्धृत कुछ अनूदित- जीवन की ही तरह होगा यहाँ सब।
लोकप्रिय पोस्ट
-
प्रेमचन्द का नारी-विमर्श – विचार एवं व्यवहार डॉ. रंजना ...
-
काव्य मीमांसा के कुछ नए आयाम ...
-
स्वाधीनता और साहित्य डॉ. रंजना अरगडे (पराधीन मृतवत् होते हौं और उन्हें सपने में भी सुख नसीब नहीं हो सकता।) स्वाधीनता और साहित्य विषय ...
-
विस्थापन का साहित्य विस्थापन का विस्तार कहाँ से कहाँ तक हो सकता है, तो इस प्रश्न का उत्तर संभवतः यही होगा- अपने घर-गाँव से जबरिया फेंके जाने...
-
साहित्य पर बात करना हमेशा ही एक ज़िम्मेदारी भरा काम होता है। आज जो छप रहा है उसमें हमारी रुचि का साहित्य कौन-सा है, इसे हर पाठक तय कर लेता ह...
-
उत्तर-आधुनिक समाज और साहित्य रंजना अरगड़े " हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हमें अपने जीते-जी इस समय में आना पड़ेगा। जीना पड़ेगा ।...
-
क्या जामक लौटाए जा सकते हैं? श्री विद्यासागर नौटियालजी का गद्य पढ़ना हमेशा ही एक प्रीतिकर अनुभव होता है। अतः जब उनका सद्य प्रकाशित (20...
-
महादेवी : आधुनिक मीरा ? उपाधि -प्रिय इस समाज में ...
-
हिन्दी शिक्षण में भारतीय परिप्रेक्ष्य रंजना अरगडे़ स्वतंत्रता के 60 वर्षों बाद 2008 में जब इस प्रकार का आयोजन हो रहा है, तो निश्चय ही यह...
-
स्वाधीनता और साहित्य डॉ. रंजना अरगडे पराधीन मृतवत् होते हौं और उन्हें सपने में भी सुख नसीब नहीं हो सकता। स्वाधीनता और साहित्य विषय पर ...
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
शनिवार, 13 मार्च 2010
हिला हिलबिला हिला क्या बिल... महिला
हिला कर रख दिया है महिला बिल ने सभी को। यही हमारे समाज
की लिटमस परीक्षा है। कौन कितने पानी में है महिलाओं की स्वतंत्रता
और अधिकारों के प्रति यह अब खुलने लगा है। मैं तो कहती हूँ हो
जाये हिसाब किताब। अगर हमारे धर्माचार्यों को( दोनों ) को कुबूल नहीं कि
महिला आरक्षण हो, तो मैं कहती हूँ धर्म और भगवान का भी बँटवारा
हो जाए। महिलाएं अब अपना अलग मंदिर बनाएँ। पुजारी भी वही हों,
इसमें पुरुषों को प्रवेश न हो। सारी देवियाँ महिलाओं के हिस्से।अब से
अंबा, दुर्गा, भवानी, ग्राम-देवियाँ, सरस्वती, गायत्री किसीको भी पूजने का
हक़ पुरुषों को न हो। विष्णु आप लें , लक्ष्मी हम ले लेते हैं। रिद्धि-
सिद्धि हमारी, गणेशजी आपके। राधा हमारी , कृष्ण आपके। पार्वती
तथा आधे शंकर हमारे आपके केवल आधे शंकर। महिलाएँ मरें तो
महिला पुजारी सब करें-विधि-विधान। इस संदर्भ में और भी बहुत कुछ
कहा जा सकता है। पर पहले इतना तय हो जाए--फिर आगे की बात।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)